सुना था तेरी महफिल में सुकूने-दिल भी मिलता है मगर हम जब भी तेरी महफिल से आये, बेकरार आये
किसी टूटे हुए मकान की तरह हो गया है ये दिल,
कोई रहता भी नही, और कमबख्त बिकता भी नही...