Tuesday, 14 October 2014

सुना था तेरी महफिल में सुकूने-दिल भी मिलता है मगर हम जब भी तेरी महफिल से आये, बेकरार आये

सुना था तेरी महफिल में सुकूने-दिल भी मिलता है
मगर हम जब भी तेरी महफिल से आये, बेकरार आये

Tuesday, 7 October 2014

किसी टूटे हुए मकान की तरह हो गया है ये दिल, कोई रहता भी नही, और कमबख्त बिकता भी नही...

किसी टूटे हुए मकान की तरह हो गया है ये दिल,

कोई रहता भी नही, और कमबख्त बिकता भी नही...

Monday, 3 March 2014

कुछ हार गयी तकदीर कुछ टूट गए सपने..

कुछ हार गयी तकदीर कुछ टूट गए सपने.. 
कुछ गैरों ने बर्बाद किया कुछ छोड़ गए अपने.. 

मज़बूत इतने है की दुनिया से लड़ जाते है,
 कमज़ोर इतने है की एक इंसान के बिना रह नहीं पाते

"ये शहर जालिमों का है जरा संभल के चलना दोस्तों, 
लोग सीने से लगा कर दिल ही निकाल लेते हैं."  


चाँद का क्या कसूर अगर रात बेवफा निकली, 
कुछ पल ठहरी और फिर चल निकली,
उन से क्या कहे वो तो सच्चे थे,
शायद हमारी तकदीर ही हमसे खफा निकली

Saturday, 1 March 2014

इंसान:

  • "क़दर किरदार की होती है... वरना... कद में तो साया भी इंसान से बड़ा होता है....

  • उदासियों की वजह तो बहुत है जिंदगी में, पर बेवजह खुश रहने का मजा कुछ और है ।

  • फूल बनकर क्या जिना एकदिन मुर्झा कर फेक दिये जाओगे, 
  • जिना है तो पत्थर बनकर् जियो कभी तराशे गये तो खुदा केहलाओगे|


  • "ज़ख्म दे कर ना पूछ दर्द की शिददत ज़ालिम, दर्द तो दर्द है... थोडा क्या ज्यादा क्या..."
  • निकला हूँ घर से तनहा पर नाउमीद मैं नहीं हूँ सफ़र में अकेला पर अकेला रहूँगा मैं नहीं।

  • तेरे इश्क का सुरूर था जो खुद को बर्बाद कर दिया, 
  • वरना एक वक़्त था जब दुनिया मेरी भी रंगीन थी.

  • तोबा क्यों करते हो तुम इश्क से, 
  • महबूब तुम्हारा बेवफा हो तो इश्क का क्या कसूर.


  • कोई चले, चले न चले हम तो चल पड़े, मंजिल की जिसे धुन हो, उसे कारवां से क्या

  • " जहाँ रौशनी की ज़रूरत हो चिराग वहीँ जलाया करो, 
  • सूरज के सामने जलाकर उसकी औकात ना गिराया करो...!"

  • बिखर जाने की ख्वाइश तो थी हमारी उस फूल पर... 
  • जो उगता तो था मंदिर ही के पास, पर चढ़ावे के वो काबिल न था!

  • "हमने ही लौटने का इरादा नहीं किया उसने भी भूल जाने का वादा नहीं किया।
  • तकदीरें बदल जाती हैं, जब ज़िन्दगी का कोई मकसद हो; 
  • वर्ना ज़िन्दगी कट ही जाती है 'तकदीर' को इल्ज़ाम देते देते!

  • "जिनको मिली है, ताक़त दुनिया सँवारने की...
  • खुदगर्ज आज उनका ईमान हो रहा है...!!"

  • उठाती है जो खतरा हर कदम पर डूब जाने का !!
  • वही कोशिश समन्दर में खजाना ढूंढ लेती है !!

  • कौन कहता है कि मुसाफिर ज़ख़्मी नहीं होते
  • रास्ते गवाह हैं ….. 
  • बस कमबख्त गवाही नहीं देते !

  • पीने दे शराब मस्जिद में बैठ के ग़ालिब..... या वो जगह बता दे, जहाँ खुदा न हो....!!

  • " खुदा करे मुझको कभी मंजिल न मिले........बड़ी मुश्किल से वो राज़ी हुआ है साथ चलने को....!!"

  • यहाँ हर शख्स हर पल हादसा होने से डरता है, खिलौना है जो मिटटी का ,फ़ना होने से डरता है.

  • बस इसी सोच से, झूठ कायम रहा .. बोल कर सच भला हम बुरे क्यूँ बनें

  • कहने वालों का कुछ नहीं जाता, सहने वाले कमाल करते हैं, कौन ढूंढें जवाब दर्दों के, लोग तो बस सवाल करते हैं !!