Saturday, 1 March 2014

इंसान:

  • "क़दर किरदार की होती है... वरना... कद में तो साया भी इंसान से बड़ा होता है....

  • उदासियों की वजह तो बहुत है जिंदगी में, पर बेवजह खुश रहने का मजा कुछ और है ।

  • फूल बनकर क्या जिना एकदिन मुर्झा कर फेक दिये जाओगे, 
  • जिना है तो पत्थर बनकर् जियो कभी तराशे गये तो खुदा केहलाओगे|


  • "ज़ख्म दे कर ना पूछ दर्द की शिददत ज़ालिम, दर्द तो दर्द है... थोडा क्या ज्यादा क्या..."
  • निकला हूँ घर से तनहा पर नाउमीद मैं नहीं हूँ सफ़र में अकेला पर अकेला रहूँगा मैं नहीं।

  • तेरे इश्क का सुरूर था जो खुद को बर्बाद कर दिया, 
  • वरना एक वक़्त था जब दुनिया मेरी भी रंगीन थी.

  • तोबा क्यों करते हो तुम इश्क से, 
  • महबूब तुम्हारा बेवफा हो तो इश्क का क्या कसूर.


  • कोई चले, चले न चले हम तो चल पड़े, मंजिल की जिसे धुन हो, उसे कारवां से क्या

  • " जहाँ रौशनी की ज़रूरत हो चिराग वहीँ जलाया करो, 
  • सूरज के सामने जलाकर उसकी औकात ना गिराया करो...!"

  • बिखर जाने की ख्वाइश तो थी हमारी उस फूल पर... 
  • जो उगता तो था मंदिर ही के पास, पर चढ़ावे के वो काबिल न था!

  • "हमने ही लौटने का इरादा नहीं किया उसने भी भूल जाने का वादा नहीं किया।
  • तकदीरें बदल जाती हैं, जब ज़िन्दगी का कोई मकसद हो; 
  • वर्ना ज़िन्दगी कट ही जाती है 'तकदीर' को इल्ज़ाम देते देते!

  • "जिनको मिली है, ताक़त दुनिया सँवारने की...
  • खुदगर्ज आज उनका ईमान हो रहा है...!!"

  • उठाती है जो खतरा हर कदम पर डूब जाने का !!
  • वही कोशिश समन्दर में खजाना ढूंढ लेती है !!

  • कौन कहता है कि मुसाफिर ज़ख़्मी नहीं होते
  • रास्ते गवाह हैं ….. 
  • बस कमबख्त गवाही नहीं देते !

  • पीने दे शराब मस्जिद में बैठ के ग़ालिब..... या वो जगह बता दे, जहाँ खुदा न हो....!!

  • " खुदा करे मुझको कभी मंजिल न मिले........बड़ी मुश्किल से वो राज़ी हुआ है साथ चलने को....!!"

  • यहाँ हर शख्स हर पल हादसा होने से डरता है, खिलौना है जो मिटटी का ,फ़ना होने से डरता है.

  • बस इसी सोच से, झूठ कायम रहा .. बोल कर सच भला हम बुरे क्यूँ बनें

  • कहने वालों का कुछ नहीं जाता, सहने वाले कमाल करते हैं, कौन ढूंढें जवाब दर्दों के, लोग तो बस सवाल करते हैं !!

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