Monday, 3 March 2014

कुछ हार गयी तकदीर कुछ टूट गए सपने..

कुछ हार गयी तकदीर कुछ टूट गए सपने.. 
कुछ गैरों ने बर्बाद किया कुछ छोड़ गए अपने.. 

मज़बूत इतने है की दुनिया से लड़ जाते है,
 कमज़ोर इतने है की एक इंसान के बिना रह नहीं पाते

"ये शहर जालिमों का है जरा संभल के चलना दोस्तों, 
लोग सीने से लगा कर दिल ही निकाल लेते हैं."  


चाँद का क्या कसूर अगर रात बेवफा निकली, 
कुछ पल ठहरी और फिर चल निकली,
उन से क्या कहे वो तो सच्चे थे,
शायद हमारी तकदीर ही हमसे खफा निकली

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